Government of Uttar Pradesh
उत्तर प्रदेश सरकार

डी.एस.टी. के बारे में

मानव सभ्यता का विज्ञान एवं वैज्ञानिकों में भरोसा अपार है। विज्ञान को सत्य की खोज के रूप में माना जाता है जो अप्रचलित अन्वेषण के लिए मूल मानव आवश्यकताओं को पूर्ण करता है जबकि तकनीक आर्थिक मूल्यों एवं समाज के जीवन को बेहतर बनाता है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तर प्रदेश सरकार विज्ञान एवं तकनीक का विस्तार पूरे उत्तर प्रदेश में करता है एवं वैज्ञानिक सोच पैदा करता है एवं समाज की बेहतरी के लिए अग्रसर है। विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में विभिन्न गतिविधियों हेतु, विभाग ने निम्न दो स्वायत्त निकायों की स्थापना करी:

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तर प्रदेश

अक्टूबर, 1972 में उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की पांचवी पंच वर्षीय योजना के संबंध में विज्ञान एवं तकनीक की भूमिका एवं विकास पर कार्यशील समूह का गठन किया।

इस क्रियाशील समूह को विज्ञान एवं तकनीक एवं उसकी एप्लीकेशन के विकास एवं अनुसंधान विकास हेतु समस्याओं एवं प्रोग्राम की पहचान हेतु इंपुट एवं इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता एवं आवश्य्कता के आकलने करने का कार्यभार सौंपा गया है एवं पांचवी पंच वर्षीय योजना अवधि के दौरान राज्य में विज्ञान एवं तकनीक की एप्लीकेशन के विकास हेतु एक्शन हेतु एकीकृत प्लान तैयार करने का कार्य कर सौंपा गया।

अनुसंधान एवं विकास की अवधारणा जैसा “विज्ञान एवं तकनीकि प्लान के दृष्टिकोण” में वर्णित है एवं जिसे विज्ञान एवं तकनीक पर राष्ट्रीय समिती द्वारा तैयार किया गया है को व्यापक पाया गया है। इसे कवर करने हेतु क्रियाशील समूह की प्रमुख संस्तुति विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य परिषद एवं साथ ही प्रशासनिक सहायता हेतु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की स्थापना थी जो क्रियाशील समूह की संस्तुतियों को लेने के लिए बाध्य हो ताकि पांचवी योजना में सम्मिलित सभी योजनाओं एवं गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा सके।

क्रियाशील समूह की संस्तुति पर अमल किया गया एवं विज्ञान एवं पर्यावरण विभाग के प्रशासनिक सहयोग के साथ “विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तर प्रदेश” की 01 मई, 1975 को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्थापना करी गई। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तर प्रदेश (सीएसटी, उत्तर प्रदेश) को सोसाइटी रेजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1860 के तहत स्वायत्त संस्था का दर्जा प्राप्त हुआ।

रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर, उत्तर प्रदेश

रिमोट सेन्सिंग तकनीक की क्षमताओं को आँकते हुए , उत्तर प्रदेश सरकार नें लखनऊ में एक रिमोट सेन्सिंग एप्लीकेशन केंद्र स्थापित करने की ओर कदम बढ़ाया है। इससे पूर्व सन 1982 में तत्कालीन सरकार द्वारा रिमोट सेन्सिंग एप्लीकेशन केंद्र एक स्वायत्त संस्था के रूप में स्थापित किया गया था। इसकी स्थापना 1960 के सोसाइटी एक्ट के अधीन की गई थी। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का वाहय स्रोतों से समुचित प्रबंधन करना था। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना था कि उभरती हुई नई तकनीक के माध्यम से हम कैसे अपने प्राकृतिक संसाधनों को उपग्रहों द्वारा रिमोट सेन्सिंग एप्लीकेशन से भली प्रकार समायोजित कर सकते हैं। इस केंद्र की स्थापना का उद्देश्य यह भी था कि रिमोट सेन्सिंग की उच्च तकनीक को उपभोक्ताओं के साथ कैसे एकरूप किया जाए।

अपनी स्थापना के प्रथम दिन से ही इस केन्द्र नें रिमोट सेन्सिंग की तकनीक द्वारा प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित सूचनाएँ एकत्र करके उसे प्रदेश सरकार के तमाम संबंधित विभागों को उपलब्ध कराना प्रारंभ कर दिया था। प्रारंभ से ही इस केंद्र की सभी प्रक्रियाएँ बहुद्देशीय कारकों में विभाजित थीं । वैज्ञानिकों का एक सक्षम दल जो कि भूगर्भ विज्ञान, जल संसाधन , वन, कृषि , मृदा विज्ञान, भूगोल, नगरीय सर्वेक्षण एवं योजनाओं इत्यादि में सिद्धहस्त था, नें अपने अपने कार्यक्षेत्र में रिमोट सेन्सिंग तकनीक की सहायता से तमाम विभागों की बहुद्देशीय परियोजनाओं को पूरा करने में अपना योगदान दिया।

यह केन्द्र विभिन्न विभागों द्वारा वांछित विशिष्ट जाँचों को रिमोट सेन्सिंग तकनीक के द्वारा तथा अन्य प्रचलित तकनीकों के सम्मिश्रण से प्रबंधित कर रहा है ताकि प्राकृतिक संसाधनों का समुचित दोहन व प्रबंधन किया जा सके । इस केंद्र के क्षमताओं का अधिकतम लाभ ग्रहण करने के परिपेक्ष्य में यह आवश्यक है कि निश्चित अंतराल पर संवाद बैठक हो जिसमें विभिन्न उपभोक्ता विभागों की खंड वार क्षमताओं को रिमोट सेन्सिंग तकनीक के साथ समायोजित करने पर विचार किया जाए। इस केंद्र द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार व अन्य राज्यों की विभिन्न परियोजनाओं को परिपूर्ण किया जा चुका है तथा बहुत सी महत्वपूर्ण सूचनाएँ अन्य उमभोकता संस्थानों को भी उपलब्ध करवाई जा चुकी हैं।