उत्तर प्रदेश सरकार

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अक्टूबर, 1972 में उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की पांचवी पंच वर्षीय योजना के संबंध में विज्ञान एवं तकनीक की भूमिका एवं विकास पर कार्यशील समूह का गठन किया।

इस क्रियाशील समूह को विज्ञान एवं तकनीक एवं उसकी एप्लीकेशन के विकास एवं अनुसंधान विकास हेतु समस्याओं एवं प्रोग्राम की पहचान हेतु इंपुट एवं इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता एवं आवश्य्कता के आकलने करने का कार्यभार सौंपा गया है एवं पांचवी पंच वर्षीय योजना अवधि के दौरान राज्य में विज्ञान एवं तकनीक की एप्लीकेशन के विकास हेतु एक्शन हेतु एकीकृत प्लान तैयार करने का कार्य कर सौंपा गया।

अनुसंधान एवं विकास की अवधारणा जैसा "विज्ञान एवं तकनीकि प्लान के दृष्टिकोण" में वर्णित है एवं जिसे विज्ञान एवं तकनीक पर राष्ट्रीय समिती द्वारा तैयार किया गया है को व्यापक पाया गया है। इसे कवर करने हेतु क्रियाशील समूह की प्रमुख संस्तुति विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य परिषद एवं साथ ही प्रशासनिक सहायता हेतु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की स्थापना थी जो क्रियाशील समूह की संस्तुतियों को लेने के लिए बाध्य हो ताकि पांचवी योजना में सम्मिलित सभी योजनाओं एवं गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा सके।

क्रियाशील समूह की संस्तुति पर अमल किया गया एवं विज्ञान एवं पर्यावरण विभाग के प्रशासनिक सहयोग के साथ "विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तर प्रदेश" की 01 मई, 1975 को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्थापना करी गई। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तर प्रदेश (सीएसटी, उत्तर प्रदेश) को सोसाइटी रेजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1860 के तहत स्वायत्त संस्था का दर्जा प्राप्त हुआ।